मराठी चे वाढ़ते प्रस्थ
मराटी ब्लॉग पर लिखे मेरे पिछले चिट्ठे पर पाठकों ने पूछा (और सवाल जायज भी था) कि पहला मराठी चिट्ठा कौन सा है। इसका जवाब तो देबाशीष के इस चिटठे पर मौजुद है। वैसे नीरव ने भी मराठी में लिखना शुरु किया है और कुछ और लोग भी, भले ही वह मराठी अंग्रेजी का मिश्रण हो, मराठी में विचार रख रहे हैं, जैसे अजीत ओक और प्रियांक । जाहिर है जब तक लोग हिन्दी जैसा मराठी वेबरिंग नहीं रच लेते, ये खबर जंगल की आग की तरह नहीं फैल सकती। जैसा कि शीर्षक मे मैने लिखा, खुशी की बात ये है कि जाल पर मराठी का दायरा बढ़ रहा है। क्या खयाल है आपका?

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