मंगलवार, जुलाई 27, 2004

कुछ याद आ गया!!!

नीरव का गज़लो का सफर पढ़ कर कॉलेज के दिनो मे कहीं से सुना हुआ ये शेर याद आ गया,

तुम काली हो ये फरीश्तों कि भूल है।
वो तिल लगा रहे थे कि स्याही बिख़र गयी।