कुछ याद आ गया!!!
नीरव का गज़लो का सफर पढ़ कर कॉलेज के दिनो मे कहीं से सुना हुआ ये शेर याद आ गया,
तुम काली हो ये फरीश्तों कि भूल है।
वो तिल लगा रहे थे कि स्याही बिख़र गयी।
नई शक्ति, नई चमकार के साथ पद्मजा का चिठ्ठा अब हिन्दी में।
नीरव का गज़लो का सफर पढ़ कर कॉलेज के दिनो मे कहीं से सुना हुआ ये शेर याद आ गया,
तुम काली हो ये फरीश्तों कि भूल है।
वो तिल लगा रहे थे कि स्याही बिख़र गयी।
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