tag:blogger.com,1999:blog-58793472007-04-16T20:55:59.380+05:30कही अनकहीPadmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comBlogger18125tag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1091540950168120122004-08-03T19:15:00.000+05:302004-08-03T19:19:10.170+05:30बिल्कुल सहिआलोक आप बिल्कुल सहि <a href="http://hindi.pnarula.com/akshargram/archives/000099.html"> क़ह</a> रहें हैं। देबाशीष बहुमुखी प्रतीभा के धनी है। और मुझे भी कुछ अच्छे काम करने के लिये प्रेरीत करते रहते हैं। जीसका उदाहरण चिठ्ठा विश्व मे मेरा योगदान है।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1090933894736079132004-07-27T16:47:00.000+05:302004-07-27T18:46:33.153+05:30कुछ याद आ गया!!!नीरव का <a href="http://niravata.blogspot.com/2004/07/blog-post_21.html">गज़लो का सफर</a> पढ़ कर कॉलेज के दिनो मे कहीं से सुना हुआ ये शेर याद आ गया, <blockquote>तुम काली हो ये फरीश्तों कि भूल है। <br /> वो तिल लगा रहे थे कि स्याही बिख़र गयी।</blockquote> Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1089878352914130502004-07-15T12:48:00.000+05:302004-08-23T17:10:38.406+05:30मराठी चे वाढ़ते प्रस्थमराटी ब्लॉग पर लिखे मेरे <a href="http://padmaja.blogspot.com/2004/06/blog-post_24.html">पिछले चिट्ठे</a> पर पाठकों ने पूछा (और सवाल जायज भी था) कि पहला मराठी चिट्ठा कौन सा है। इसका जवाब तो देबाशीष के <a href="http://nuktachini.blogspot.com/2004/03/blog-post.html">इस चिटठे</a> पर मौजुद है। वैसे <a href="http://paulvat.blogspot.com">नीरव</a> ने भी मराठी में लिखना शुरु किया है और कुछ और लोग भी, भले ही वह मराठी अंग्रेजी का मिश्रण हो, मराठी में विचार रख रहे हैं, जैसे <a href="http://ajitoke.blogspot.com/">अजीत ओक</a> और <a href="http://www.priyank.com/">प्रियांक</a> । जाहिर है जब तक लोग हिन्दी जैसा मराठी वेबरिंग नहीं रच लेते, ये खबर जंगल की आग की तरह नहीं फैल सकती। जैसा कि शीर्षक मे मैने लिखा, खुशी की बात ये है कि जाल पर मराठी का दायरा बढ़ रहा है। क्या खयाल है आपका? Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1089696542350089652004-07-13T10:56:00.000+05:302004-07-13T11:12:16.786+05:30जरुरत है !!मेरी, हिन्दी में मात्राओ कि गलतीयों को देखकर लगता है कि कोई एक अदद हिन्दी स्पेल चेकर होता तो क्या बात होती, वैसे प्रोजेक्ट अच्छा है ये, यदि कोई काम करना चाहे तो। ढुंढने निकलो तो भगवान भि मिल जायेंगे । ये लिजीये गुगल भैया ने तो ढेर सारि <a href="http://www.google.com/search?hl=en&lr=&ie=UTF-8&q=hindi+spell+checker">लिनक्स</a> दे दि. Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1088075002069666562004-06-24T16:24:00.000+05:302004-06-24T16:33:22.070+05:30दुसरा मराठी चिट्ठा. . .मराठी चिट्ठा <a href="http://naatyaa.blogspot.com/">वाट्टेल ते</a> पढ़कर बड़ा सुकून मिला । अपनी मातृ भाषा की मिठास हमेशा हि दिल को ठंड़क देने वाली होती है।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1087967055300229522004-06-23T10:06:00.000+05:302004-06-23T10:34:15.300+05:30निरव जी भी आ गयेवाह <a href="http://niravata.blogspot.com">निरव</a> जी , क्या बात है! पहले तो चीट्ठो की दुनीया में आपका स्वागत है। हमे नही मालुम था कि आपको भी मछलीयों का शौक है। मछलियों के बारे मे मैने तो सुना था कि सात सुनहरी और एक काली मछली रखते है, अगर कोई जानकार हो तो बताये।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1087373874736431932004-06-16T13:03:00.000+05:302004-06-16T14:14:21.433+05:30चिट्ठा विश्व . . .इस हफ्ते <a href="http://www.myjavaserver.com/~hindi/">चिट्ठा विश्व</a> में कुछ योगदान दिया। अभी तो यह बीटा वर्जन में है, <a href="http://nuktachini.blogspot.com/">देबाशीष</a> अभी लेखन सामग्री जुटाने मे लगे हैं। आपके सुझाव भी आमंत्रित हैं। <p> पर ये क्या? मेरा ही चिट्ठा इस सूची से गायब है? पता चला कि जब तक अपना चिट्ठा अपडेट नही करो ये दिखायेंगे नहीं। तो लो भाई, ये हो गया हमारा चिट्ठा भी अपडेट।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1084184925226552002004-05-10T15:56:00.000+05:302004-05-10T15:58:45.226+05:30नया रूपहा भाई आज <a href="http://www.blogger.com/">ब्लॉगर</a> ने तो वाकई कमाल कर दिया। डैशबोर्ड बडा हि अच्छा लगा। Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1082626577445636042004-04-22T15:06:00.000+05:302004-04-22T15:10:24.466+05:30पैसा बनाम अंतरात्माजिस देश में गुरु को पूजने की परम्परा रही हो वहीं आजकल टीवी पर शाहरुख खान एक विञापन में स्कूली बच्चों को सिखा रहे हैं कि टीचर से प्यार कैसे करें। क्या यही शिक्षा देना चाहते हैं हम अपने बच्चों को? फिल्मी हीरो का अनुकरण लगभग हर बच्चा करता है, अगर वही व्यक्ति इस तरह के विञापन करे, ऐसा आदर्श प्रस्तुत करे तो, किस तरह कि संस्कृति का उदय होगा ये तो हम सोच सकते हैं। क्या शाहरुख ने ये विञापन करने से पहले एक बार भी यह नहीं सोचा होगा? पैसे के लिए मदिरा के प्रचार से लेकर इस तरह के अभियान से जुड़ना कहाँ तक उपयुक्त है। क्या पैसा ही इन लोगों के लिए सब कुछ है? Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1077538466716638292004-02-23T17:44:00.000+05:302004-02-23T17:50:35.436+05:30वाह मजा आ गयाअतुल अरोरा जी ने <a href="http://lifeinahovlane.blogspot.com/">लाईफ ईन ए एचओचवी लेन</a> में रोज मर्रा की बातें भी कितने मजेदार अंदाज मे लिखी है।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1076049084494394182004-02-06T12:01:00.000+05:302004-02-06T12:20:31.996+05:30बाल मजदूरी और हम<p><a href='http://peekintomymind.blogspot.com/2004_02_01_peekintomymind_archive.html#107598603920462384' >चारु</a> ने नुक्ता‍ चीनी में <a href='http://nuktachini.blogspot.com/2004_02_01_nuktachini_archive.html#107595703872420645'>बाल मजदूरी</a> पर अपने विचार व्यक्त किये हैं।</p><p> चारु जहां तक आपकी बाई की बेटी का सवाल हैं तो घर पर अकेले रहने से तो अच्छा हैं कि वो माँ के साथ जाये। काम पर वो पढ़ाई भी कर सकती है और अगर वो भी काम करती है तो इससे उसे जिम्मेदारी का अहसास होगा और ये भी पता चलेगा कि उसकी माँ कितनी मेहनत करती है। बेटी के घर पर अकेले रहने में माँ के लिये ज्यादा चिंता की बात है.</p><p> पर हाँ, हम सभी को इस बारे में सोचना चाहिये और ये प्रयास करना चाहिये कि भले ही ये बच्चे हमारे यहा काम करते हो , पर उनकी पढ़ाई ठीक से चलें, उनको किताबें आसानी से मिल जायें, उनकी पढाई में मदद करें, ताकि कल वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें।</p> Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1075186358716681792004-01-27T12:22:00.000+05:302004-01-27T12:34:01.763+05:30ऐक और . . .<p>ऐक और <a href="http://abhivyakti.blogspot.com/">अभिव्यक्ति</a>। मुबारक हो शैल , हिन्दी चट्ठे कि दुनीया में आपका स्वागत है। </p>Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1075185859935887872004-01-27T12:14:00.000+05:302004-01-30T12:39:58.700+05:30संस्मरण : ‍ मेरी मांडव यात्रा<p>कड़ाके की ठंड थी , पर हम ६.४५ पे निकल ही पड़े। बेटमा मे एक जगह अलाव जलते देखा तो रुक कर हाथ ताप लिये, साथ में चाय की तलब बिना बोले लग ही जाती है। धार में थोड़ा काम निपटा कर चाय पोहे खा कर आगे बढ़े, १ घंटे मे मांडव। बीच में कुछ ४ की.मी. का रास्ता काफी खराब था। रानी रुपमती महल, बाज बहादुर महल, चंपा बावड़ी, जामी मस्जिद, जहाज महल, हिंडोला महल के अवशेष आज भी पुराने वैभव की दास्तान सुनाते हैं। जहाज महल मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया। घूमते घूमते २ बज गये, लौटते हुऐ गॉर्ज व्यू पे करीब आधा घंटा बैठे बड़ा ही सुकून भरा पॉईंट है ये। ३ बजे वापस आने को चले, रास्ते में धार मे खाना खाया, ५ बजे वापस अपने घर। </p> <p>कल तो सब अच्छा लग रहा था पर आज हड्डीयां बोल रही हैं।</p>Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1074689828685884422004-01-21T18:27:00.000+05:302004-01-21T18:35:09.483+05:30मुसीबत को धक्का दो ‍ः<p>अगर ट्रिगर में कोई मुसीबत आ जाये तो सिर्फ रेज़ शब्द लिख कर उसको आगे चलता कर सकते है , बिना आडे हाथों लिये।</p> <p>ये आज की सीख है ।</p>Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1074488358653716652004-01-19T10:29:00.000+05:302004-05-12T13:07:09.623+05:30बोर काम . . .हे भगवान ! ये डाँक्युमेन्टेशन कितना बोर करता है । दो प्रोजेक्ट के बीच के समय को बरबाद करता है | कही अनकही सारी डीटेल्स लीखवा लेता है ।Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1074257045493415212004-01-16T18:14:00.000+05:302004-05-12T13:09:16.176+05:30कुछ कदम आगे बढें . . .बस अब बहुत हो चुका । अब कुछ काम की बात लिखी जाये । पर क्या लिखा जाय , कुछ अलग और कुछ और की चाह पता नहि कहा ले जायेगी । अब चिट्ठे को तो इंग्लिश से हिन्दी मे ले हि आये है, बाकी रही बात लिखने की तो वो भी आ ही जायेगा । हा, <a href="http://www.jroller.com/page/debashish/">देवाशीष</a> की मदद से और <a href="http://devanaagarii.net/hi/alok/blog/">आलोक</a> के चिट्ठे से प्रेरीत हो कर आज ऐक रुका हुआ काम आगे तो बढ़ा ।</p>Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1074247745154311052004-01-16T15:39:00.000+05:302004-01-16T15:54:44.250+05:30नमस्ते। क्या आप हिन्दी देख पा रहे हैं?Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5879347.post-1072949219416162452004-01-01T14:56:00.000+05:302004-01-01T14:57:17.240+05:30Happy New YearHappy New Year To all Readers.Padmajahttp://www.blogger.com/profile/13037971575325997803noreply@blogger.com